यूट्यूब का मॉडल उत्तेजक और हिंसक कंटेंट को बढ़ावा देता है, उसे हटाना बहुत मुश्किल



गैजेट डेस्क. यूट्यूब की सीईओ सुसन वोजसिसकी को क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड में दो मस्जिदों पर हमले की पहली सूचना रात 8 बजे मिली थी। शूटर ने जनसंहार की लाइव स्ट्रीमिंग फेसबुक पर की। इसके फुटेज यूट्यूब सहित सोशल मीडिया पर शेयर किए गए। वोजसिसकी से चर्चा के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने वीडियो के अलग-अलग वर्जन देखे ताकि मशीन लर्निंग प्रोग्राम उन्हें हटा सके। पुराने वीडियो हटाए जाते उससे पहले नए वर्जन अपलोड कर दिए जाते थे। आखिरकार, सुबह 6 बजे किसी भी व्यक्ति के देखे बिना सभी संदिग्ध वीडियो हटाने का फैसला किया गया।

500 घंटे के नए वीडियो अपलोड

वोजसिसकी ने कहा, हम ऐसा प्लेटफार्म नहीं बनना चाहते हैं, जहां लोगों को इस तरह का कंटेंट मिले। विश्व में बड़ी संख्या में सरकारें और नियामक संस्थाओं का विचार है कि सोशल मीडिया को अपने तरीके बदलना चाहिए। फेसबुक को जमकर आड़े हाथों लिया गया है। लेकिन, सर्च एंजिन गूगल की कंपनी यूट्यूब की समस्याएं पेचीदा हैं। उस पर हर मिनट 500 घंटे के नए वीडियो अपलोड होते हैं। इनकी मॉनिटरिंग बेहद कठिन है।

मनोरंजन, जानकारी देने जैसी कई विशेषताओं के साथ यूट्यूब का काला पक्ष भी है। 2017 में साइट पर इस्लामिक स्टेट के हिंसक वीडियो देखे गए। उसी वर्ष कई लड़के, लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो आए। कई मशहूर सितारों ने शालीनता की सीमाएं लांघी हैं। घृणा फैलाने वाले लोगों को जगह देने के कारण पिछले वर्ष से यूट्यूब के खिलाफ आवाज उठी है। फरवरी में बच्चों के वीडियो पर कुछ बाल यौन शोषकों के कॉमेंट की तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

फेसबुक, टि्वटर के समान यूट्यूब पर आरोप है कि वह मीडिया या एक्टिविस्ट के ध्यान खींचे जाने के बाद ही विशेष समस्याओं की तरफ ध्यान देती है। लेकिन, उससे पहले उसका एल्गोरिथम लाखों बार आपत्तिजनक कंटेंट दिखा चुका होता है। गूगल के पूर्व कर्मचारी गुईलाउमे चासलोट का कहना है, साइट की जानबूझकर बनाई डिजाइन के कारण ऐसा होता है। यूजर्स को साइट पर अधिक समय तक रखने के लिए एक एल्गोरिथम और यूजर इंटरफेस किसी भी विषय पर अधिक उग्र और उत्तेजक वीडियो दिखाता है। साइट का मॉडल उन लोगों को बढ़ावा देता है जो अधिक निर्मम कंटेंट देते हैं।

जनवरी में यूट्यूब ने कहा, वह ऐसे वीडियो की सिफारिश नहीं करेगा जो नुकसानदेह हैं। 29 अप्रैल को गूगल के बॉस सुंदर पिचई ने कहा, यूट्यूब की सर्वोच्च प्राथमिकता जिम्मेदारी है। कंपनी ने कंटेंट पर ध्यान देने के लिए स्टाफ बढ़ाया है। वोजसिसकी का कहना है, कठोर नियंत्रण और टेक्नोलॉजी से हम जहरीले कंटेंट की समस्याओं को सुलझा लेंगे। फिर भी सवाल उठाता है, दिनभर में एक अरब घंटों के वीडियो पर कैसे काबू पाया जा सकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भी बहुत प्रभावी नहीं है। वह केवल कॉपीराइट उल्लंघन जैसे सीधे-सपाट काम करने के लिए ही प्रशिक्षित है।

पूरा कंटेंट लगातार देखने में एक लाख वर्ष का समय लगेगा

2005 में शुरुआत के बाद से यूट्यूब ने लोगों को नए किस्म का मनोरंजन मुहैया कराया है। वह चीन को छोड़कर दुनिया के सभी हिस्सों में मुफ्त टेलीविजन सेवा बन चुकी है। दो अरब लोग हर माह साइट पर जाते हैं। इंटरनेट पर विश्व की 11% बेंडविड्थ में उसकी हिस्सेदारी है। उससे आगे केवल नेटफ्लिक्स है। उसके कंटेंट को एक बार में देखने के लिए एक लाख वर्ष लगेंगे।

2018 में 11870 करोड़ रुपए कमाए, सितारों को भी फायदा

  • कंसल्टेंसी फर्म मीडिया रिसर्च के अनुसार 2018 में यूट्यूब की आमदनी 11870 करोड़ रुपए थी। इसका लगभग आधा पैसा कंटेंट बनाने वालों के हिस्से में गया है।
  • बच्चों के टॉप चैनल हर वर्ष विज्ञापन से करोड़ों रुपए कमाते हैं।
  • एक सर्वे में पता लगा है, 40% युवा सब्सक्राइबर कहते हैं, यूट्यूबर उन्हें परिजनों की तुलना में अच्छी तरह से समझते हैं। 60% का कहना है, यूट्यूबर्स ने उनकी जिंदगी बदल दी है।

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YouTube promotes provocative and violent content difficult to remove it

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