बैंकिंग, सरकारी संस्थान और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट 2018-19 में साइबर अपराधियों के सबसे ज्यादा निशाने पर रहे: सिस्को



गैजेट डेस्क. बैंकिंग-फाइनेंस, सरकारी संस्थान और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट 2018-19 में भारत में साइबर अपराधियों के सबसे ज्यादा निशाने पर रहे। यह जानकारी टेक कंपनी सिस्को की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर हमलों में से 26% हमले ऐसे हुए जिससे हर मामले में 50 लाख डॉलर (करीब 35 करोड़ रुपए) या इससे अधिक का नुकसान हुआ।

  1. सिस्को के भारत और सार्क के डायरेक्टर (सिक्युरिटी बिजनेस) विशाक रमण ने कहा, ‘हैकर्स निरंतर रूप से सक्रिय हैं और वे बहुत सोच-समझकर अपना निशाना तय करते हैं। हमने पाया है कि कुल हमलों में से 20.1% बैंकिंग-फाइनेंस से जुड़े संस्थान पर हुए। दूसरा नंबर सरकारी संस्थानों का है। 2018-19 में हुए कुल साइबर हमलों में से 19.6% सरकारी संस्थानों पर किए गए। 15.1% हमलों के साथ महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर तीसरे स्थान पर है।’ उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब डिफेंस, आईटी, टेलीकॉम और हेल्थकेयर को भी पहले की तुलना में ज्यादा निशाना बना रहे हैं।

  2. पिछले वित्त वर्ष में हुए कुल साइबर हमलों के 15.1% हमले डिफेंस संस्थानों पर किए गए। साइबर अपराधी अब हमले के लिए कई मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते हैं। रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट, ई-कॉमर्स को निशाना बनाने के लिए प्वॉइंट ऑफ सेल अटैक ज्यादा किए जाते हैं। इसके अलावा पब्लिक सेक्टर इकाइयों, ट्रांसपोर्टेशन, बैंकिंग-फाइनेंस को निशाना बनाने के लिए रैंसमवेयर का इस्तेमाल किया जाता है।

  3. रमण ने सिस्को द्वारा की गई एशिया-पैसिफिक सिक्योरिटी कैपेबिलिटी बेंचमार्क स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि जिन संस्थानों पर साइबर हमले हुए उनमें से 21% ने बताया कि उन्हें हमले से करीब 40 से 99 लाख डॉलर (करीब 35 करोड़ से 70 करोड़ रुपए तक) का नुकसान हुआ है। वहीं, 5% संस्थानों को इन हमले से 1 करोड़ डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपए) से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

  4. ऐसा नहीं है कि साइबर हमलों से सिर्फ रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। ग्राहक और अन्य खर्च भी इसमें शामिल हैं। कुछ संस्थानों को अपेक्षाकृत कम नुकसान भी हुआ है। 27% मामलों में नुकसान की राशि 1 लाख डॉलर (करीब 70 लाख रुपए) या इससे कम रही है। कुछ मामलों में राशि भले ही कम हो लेकिन, कुल मिलाकर आंकड़ा काफी बड़ा हो जाता है। इनसे बचने के लिए कंपनियां संभावित खतरों की पहले से पहचान करने की कोशिश कर रही है।

    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

      from Dainik Bhaskar
      https://ift.tt/2z530TT

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Skip to toolbar