नए ट्रैफिक रूल से हिचक क्यों रहीं BJP सरकारें?

नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने नया मोटर वाहन कानून बनाया, जिसे एक सितंबर से देश भर में लागू किया जाना था। इसके तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना कई गुना बढ़ा दिया गया। जहां कुछ राज्यों ने इसे लागू कर दिया है, वहीं कई बीजेपी शासित राज्य ऐसे हैं जिनमें यह लागू नहीं किया गया या फिर उन्होंने इसमें अपने हिसाब से बदलाव कर जुर्माने की रकम को घटा दिया है। आखिर क्या वजह है कि वे बीजेपी शासित राज्य जो केंद्र की मोदी सरकार के बनाए हर कानून को जल्दी से जल्दी लागू करने को आतुर रहते थे, वे नए मोटर वाहन कानून को लागू करने से हिचक रहे हैं या देरी करने की कोशिश कर रहे हैं।

राज्यों ने निकाले अपने रास्ते
उत्तराखंड की बीजेपी सरकार भी इस मसले पर चिंतित दिखी। नए वाहन कानून को लेकर बुधवार को उत्तराखंड सरकार ने कई मदों में जुर्माना आधा करने और कई में छूट देने का फैसला किया है। वहीं हरियाणा में चुनावों को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में चालान को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस चालान करने से पहले लोगों को जागरूक करेगी। ऐसे में साफ है कि चुनावों से पहले पुलिस नए नियमों के तहत चालान नहीं काटेगी।

सूत्रों के मुताबिक हरियाणा में नए मोटर वाहन नियमों को लेकर एक महीने तक नरमी बरती जाएगी। गोवा में भी बीजेपी की सरकार है और यहां भी अब तक स्थिति साफ नहीं है कि नया मोटर वाहन कानून जस का तस लागू हो पाएगा। यहां की बीजेपी सरकार भी दुविधा में नजर आ रही है और फिलहाल यह कह दिया गया है कि दिसंबर तक जुर्माने की नई दरें लागू नहीं की जाएंगी। यही नहीं, सरकार की तरफ से कहा गया कि हम पहले सड़कों की हालत सुधारना चाहते हैं, जो बरसात की वजह से खराब हुई हैं।

रिस्क लेने की हिम्मत नहीं
बीजेपी की लोकसभा चुनाव में जीत की अहम भूमिका निभाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी नए ऐक्ट और जुर्माने की दरों को लेकर असमंजस बना हुआ है। यहां भी अब तक नए ऐक्ट के हिसाब से पेनाल्टी लेने का नोटिफिकेशन नहीं हुआ है और इस पर किया जा रहा है कि पेनल्टी दर कैसे कम रखें। यूपी में इसलिए हिचकिचाहट दिख रही है क्योंकि योगी सरकार ने सत्ता ने आते ही सारी सड़कों की हालत सही करने, सारे गड्ढे भरने की बात कही थी लेकिन आज भी हालात सुधरे नहीं हैं। ऐसे में लोगों का गुस्सा भड़कने का भी खतरा है।

जानकारों का मानना है कि जुर्माने की दरें जिस तरह कई गुना बढ़ा दी गई हैं, उससे लोगों में नाराजगी है और खासकर मिडल क्लास में। बीजेपी खुद भी मिडल क्लास को नाराज नहीं करना चाहती और राज्य सरकारें भी यह रिस्क नहीं लेना चाहती। जुर्माने की दरें सामने आने के साथ ही सोशल मीडिया में विरोध शुरू हो गया। महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं। शिवसेना मोर्चा खोल चुकी है और बीजेपी के अंदर से सवाल उठ रहे हैं।

गडकरी पर निशाना
बीजेपी शासित कुछ राज्यों के ढीले रुख से राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा हो रही है कि कहीं ये ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी के फैसले की वजह से तो नहीं हो रहा। दबी जुबान में बीजेपी के कुछ नेता भी इसका जिक्र कर रहे हैं लेकिन कोई खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है। वह साफ तो कुछ नहीं कह रहे लेकिन यह सवाल जरूर सामने रख रहे हैं कि पीएम मोदी हर एक अहम अभियान में लोगों से सहयोग करने का जिक्र करते रहे हैं और लोगों में उसका असर भी होता है। लेकिन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए उठाए गए इस कदम का ऐसा कोई जिक्र नहीं किया गया।

गडकरी अपने इस कदम को बेहद अहम बता चुके हैं और इसकी जरूरत के बारे में लगातार बोल रहे थे। यह एक तरह से ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी का ही महत्वाकांक्षी कदम है। कई जगह रोड ऐक्सीडेंट पीड़ितों के परिवार वाले उनके इस कदम के समर्थन में भी आए हैं। बावजूद इसके बीजेपी शासित राज्यों के ही ढीले रुख से और राज्य स्तर पर पेनल्टी कम करने जैसे कदम से सवाल तो उठ ही रहे हैं। यह सवाल भी सामने है कि क्या केंद्र सरकार इसमें अपने कदम पीछे खींच सकती है/ गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान नितिन गडकरी के कुछ ऐसे बयान आए जिसने बीजेपी की टॉप लीडरशिप को असहज किया। हालांकि कुछ बयानों पर गडकरी ने सफाई भी दी और मीडिया पर ही उसे गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया।

राज्य सरकारों ने फंसाया पेच
मोटर वीइकल एक्ट में संशोधन के बाद ट्रैफिक उल्लंघन पर तय की गई जुर्माना राशि में गुजरात के कटौती करने के ऐलान के बाद अब रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री इस मामले में कानूनी राय ले रही है। मंत्रालय का कहना है कि कानूनन राज्य सिर्फ कम्पाउंडिंग धाराओं के मामले में ही जुर्माना राशि तय कर सकते हैं। यह राशि भी वे ऐक्ट में दी गई रेंज के भीतर ही रख सकते हैं यानी न्यूनतम जुर्माना राशि से कम नहीं रख सकते। इस बीच दिल्ली सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि कम्पाउंडिंग धाराओं वाले चालान पर जुर्माने के मामले में वह जल्द ही राहत दे सकती है।

जुर्माना राशि को लेकर भ्रम इसलिए बना है, क्योंकि किसी एक तरह के ट्रैफिक उल्लंघन के मामले में यूपी में जुर्माना राशि कम है जबकि दिल्ली में वह अधिक है। मिनिस्ट्री का कहना है कि ऐक्ट में जो संशोधन किया गया है, उसमें कम्पाउंडिंग धाराओं के तहत आने वाले उल्लंघन के मामलों में न्यूनतम और अधिकतम जुर्माना राशि तय की है। अधिकारियों के मुताबिक यह सेंट्रल ऐक्ट है इसलिए इसे राज्य सरकारों को लागू करना होता है और राज्यों को जो अधिकार हैं, वे उनका ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

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