आजादी: ऐसे तय हुई थी भारत-पाक की सीमा

नई दिल्ली
अंग्रेजों ने भारत को 1947 में आजादी देने का फैसला तो ले लिया था, लेकिन इसके साथ ही वह इसके दो टुकड़े भी करके गए। अपने शासन की शुरुआत से ही बांटो और राज करो की नीति का उन्होंने अंत तक पालन किया और एक कमजोर भारत बनाने की कोशिश में उन्होंने इसके दो टुकड़े किए। बंगाल और पंजाब के मुस्लिम बहुल हिस्सों के अलावा खैबर पख्तूख्वा और सिंध को वे पाकिस्तान के हिस्से में देकर गए। भारत और पाकिस्तान के विभाजन और उनकी सीमा के निर्धारण का किस्सा भी दिलचस्प है।
आइए जानते हैं, कैसे हुआ था भारत का विभाजन…रेडक्लिफ के नेतृत्व में बाउंड्री कमिशन
भारत छोड़ने से करीब 5 सप्ताह पहले अंग्रेजों ने जुलाई, 1947 को विभाजन की रूपरेखा तैयार कर ली थी। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा के निर्धारण के लिए अंग्रेजों ने बाउंड्री कमिशन का गठन किया था। इसका मुखिया सर सिरिल रेडक्लिफ को बनाया गया था। इस आयोग में 4 कांग्रेस और 4 मुस्लिम लीग के नेता भी शामिल किए गए थे।

पहली बार बंटवारे के लिए ही आए रेडक्लिफ
इस आयोग मुस्लिम बहुल पाकिस्तान और हिंदू बहुल भारत की सीमाओं के निर्धारण का काम किया। दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत और पाकिस्तान की सीमाओं का निर्धारण करने वाले रेडक्लिफ का यह पहला ही भारत दौरा था। ब्रिटिश शासन ने रेडक्लिफ को हिंदू और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों एवं कुछ अन्य फैक्टर्स के आधार पर सीमा निर्धारण का आदेश दिया गया था। हालांकि अन्य कारण क्या थे, इसका कभी खुलासा नहीं किया गया। हालांकि माना जाता है कि इसके कारण आर्थिक और कॉम्युनिकेशन रहे होंगे, जैसे सिंचाई चैनल और रेलवे लाइन।

आजादी के दो दिन बाद तय हुई सीमा
भारत और पाकिस्तान की सीमा को तय करने वाली रेडक्लिफ लाइन के बारे में आधिकारिक घोषणा आजादी के दो दिन बाद 17 अगस्त, 1947 को की गई। दोनों देशों के बीच यह विभाजन दुनिया के इतिहास में मानव आबादी के सबसे बड़े पलायन का कारण बना। अनुमानों के मुताबिक दोनों देशों से एक-दूसरे की ओर 1 करोड़ 40 लाख लोगों ने पलायन किया। इसके अलावा इस त्रासदी में 10 लाख से ज्यादा लोगों की हिंसा में मौत हो गई।

from India News: इंडिया न्यूज़, India News in Hindi, भारत समाचार, Bharat Samachar, Bharat News in Hindi https://ift.tt/2OXtrp9

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Skip to toolbar